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पं. बैजनाथ शर्मा प्राच्य विद्या शोध संस्थान वर्ष 2005 में उत्तर प्रदेश, भारत के हाथरस जिले में डा. अशोक शर्मा द्वारा स्थापित किया गया. संस्थान निम्नलिखित उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिये काम कर रहा है ।

हमारे लक्ष्य

  • प्राचीन भारत में गुरूकुल प्रणाली के शैक्षणिक माहौल में प्रचलित शिक्षा और वैज्ञानिक अनुसंधान की व्यवस्था, तरीकों, और विधियों को उजागर करना |
  • भाषाई प्रक्रिया की सहायता से उन मार्गों और साधनों को खोज निकालना जिन के द्वारा हम सफलतापूर्वक संस्कृत आदि भाषाओं में लिखे गए साहित्य, दर्शन या शुद्ध विज्ञान के प्राचीन भारतीय ग्रंथों के पाठ और उन में प्रयुक्त शब्दों के सटीक और वैज्ञानिक अर्थ एवं निष्कर्षों को समझ सकते हैं ।
  • शुद्ध विज्ञान की संस्कृत में लिखी मूल पुस्तकों और प्रामाणिक ग्रंथों की खोज और उन्हें साहित्यिक धार्मिक और लोक महत्व की किताबों से अलग करना तथा साहित्यिक, धार्मिक और लोक महत्व की पुस्तकों में से शुद्ध वैज्ञानिक चिन्तन को खोज कर उसकी वैज्ञानिकता की परख करना ।
  • भारतीय ऋषियों की चिन्तन पद्धति, उनकी अवधारणाएँ, मन्तव्यों और उनके स्वरूप जैसे समय, दूरी, कोण तथा भार के मापन की इकाइयों का निर्माण, तथा ज्ञान के विविध क्षेत्रों में मानकों की स्थापना को खोज और समझ कर वर्तमान ज्ञान-विज्ञान के क्षेत्र में उनके योगदान को रेखांकित करना ।
  • प्राचीन भारत में ऋषियों के द्वारा इस्तेमाल किये गये उपकरण यंत्र और तंत्र को प्रदर्शित करने के लिए स्वरूप को उदाहरण देकर स्पष्ट करना और उनके पीछे के वैज्ञानिक सिद्धांतों को खोज कर उनकी व्याख्या करना ।
  • हमारे पूर्वजों द्वारा विकसित सिद्धांतों के साथ आधुनिक विज्ञान और सिद्धांतों के परिणामों की तुलना और उनका मूल्यांकन करना ।

इन मुख्य उद्देश्यों के साथ हम पं. बैजनाथ शर्मा द्वारा इस दिशा में किये गये कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए प्रयत्न करेगें। हमें विश्वास है कि तभी यह ट्रस्ट सही मायनों में “पं. बैजनाथ शर्मा प्राच्य विद्या शोध संस्थान, हाथरस” के रूप में जाना जायेगा ।